उपसर्ग – परिभाषा, भेद और उदाहरण

उपसर्ग – परिभाषा, भेद और उदाहरण

हिंदी व्याकरण में उपसर्ग एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है। चाहे बोर्ड परीक्षा हो या प्रतियोगी परीक्षा, उपसर्ग से जुड़े प्रश्न लगभग हर परीक्षा में पूछे जाते हैं। इस लेख में हम सरल भाषा में उपसर्ग की पूरी जानकारी देंगे — परिभाषा, अर्थ, भेद और ढेर सारे उदाहरणों के साथ।


उपसर्ग किसे कहते हैं?

जब कोई शब्दांश किसी मूल शब्द के पहले लगकर उसके अर्थ को बदल देता है या उसमें नया अर्थ जोड़ देता है, तो उसे उपसर्ग कहते हैं।

सरल शब्दों में — उपसर्ग वह छोटा टुकड़ा है जो शब्द के आगे जुड़ता है।

उदाहरण:

  • + सत्य = असत्य (सत्य नहीं)
  • सु + मन = सुमन (सुंदर मन)
  • अति + रिक्त = अतिरिक्त (अधिक)

उपसर्ग की परिभाषा

“वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द या धातु के पूर्व (आगे) जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता उत्पन्न करते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।”

उपसर्ग स्वयं अकेले कोई अर्थ नहीं रखते, लेकिन शब्द के साथ मिलने पर नया अर्थ बनाते हैं।

मुख्य बातें:

  • उपसर्ग हमेशा शब्द के पहले लगते हैं।
  • ये खुद स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होते।
  • ये शब्द का अर्थ बदल, विपरीत या नया कर देते हैं।

उपसर्ग का अर्थ

“उपसर्ग” शब्द दो भागों से मिलकर बना है:

  • उप = समीप / पास
  • सर्ग = सृजन / जोड़ना

अर्थात् — “जो शब्द के पास आकर जुड़ जाए, वह उपसर्ग है।”

उपसर्ग लगाने से शब्द का अर्थ तीन प्रकार से बदलता है:

  1. विपरीत अर्थ बनाना — जैसे: सत्य → असत्य
  2. विशेष अर्थ जोड़ना — जैसे: काल → सुकाल
  3. नया शब्द बनाना — जैसे: हार → आहार

उपसर्ग के भेद

हिंदी में उपसर्गों को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है:

1. तत्सम उपसर्ग
2. तन्द्रव उपसर्ग
3. आगत उपसर्ग

1. तत्सम – संस्कृत के उपसर्ग

ये उपसर्ग संस्कृत भाषा से हिंदी में आए हैं। ये सबसे अधिक प्रचलित हैं।

प्रमुख संस्कृत उपसर्ग: अति, अधि, अनु, अप, अभि, आ, उत्, उप, दुर्, निर्, नि, परा, प्रति, परि, प्र, वि, सु, सम् आदि

उदाहरण:

  • प्र + कार = प्रकार
  • सु + फल = सुफल
  • वि + शेष = विशेष

2. तन्द्रव  – हिंदी के उपसर्ग

ये उपसर्ग हिंदी की अपनी भाषा से उत्पन्न हुए हैं।

प्रमुख हिंदी उपसर्ग: उ, क, नि, भर, अन, उन्, दु, कु, अध

उदाहरण:

  • अन + पढ़ = अनपढ़
  • कु + पुत्र = कुपुत्र
  • भर + पेट = भरपेट

3. आगत  – उर्दू/अरबी-फारसी के उपसर्ग

ये उपसर्ग उर्दू, अरबी और फारसी भाषा से हिंदी में आए हैं।

प्रमुख उपसर्ग: कम, खुश, बा, दर, ना, ला, सर, हम, हर, बद, बे, गैर

उदाहरण:

  • ना + पसंद = नापसंद
  • बे + काम = बेकाम
  • खुश + मिजाज = खुशमिजाज

उपसर्ग के उदाहरण (तालिका)

1. तत्सम (संस्कृत) उपसर्ग

ये उपसर्ग संस्कृत भाषा से सीधे हिंदी में आए हैं। इन्हें तत्सम उपसर्ग भी कहते हैं। ये सबसे अधिक प्रचलित और संख्या में सबसे अधिक हैं।

तत्सम उपसर्ग के उदाहरण:

उपसर्गउपसर्ग का अर्थउपसर्ग का उदाहरण
अतिअधिकअत्याचार, अत्यंत, अतिरिक्त, अत्यधिक
अधिऊपर, श्रेष्ठअधिकार, अध्यक्ष, अधिकरण
अनुपीछे, समानअनुचर, अन्वय, अनुसार, अनुभव
अपबुरा, हीनअपमान, अपयश, अपव्यय, अपशकुन
नहींअहिंसा, अमर, अधर्म, अन्याय
अभिसामने, ओरअभियोग, अभिमान, अभिलाषा, अभिनव
पूर्णआगमन, आगम, आजन्म, आचरण
उत्ऊँचा, श्रेष्ठउत्कर्ष, उत्थान, उत्तम, उत्तेजना
उपनिकट, छोटाउपवन, उपकार, उपयोग, उपदेश
दुर्बुरा, कठिनदुर्गम, दुर्जन, दुर्बल, दुराचार
निर्रहित, नहींनिर्भर, निर्दोष, निर्गुण, निर्विकार
निनीचे, निषेधनिचला, निषेध, निबंध, निवास
पराविपरीत, नाशपराजय, पराभव, पराक्रम, परामर्श
प्रतिओर, विरोधप्रतिकूल, प्रतिध्वनि, प्रत्यागमन
परिचारों ओरपर्यावरण, परिणाम, परिवर्तन, परिक्रमा
प्रअधिकप्रयत्न, प्रकार, प्रयोग, प्रताप, प्रबल, प्रस्ताव
विविशेष, अभावविशेष, विहार, विराम, विदेश
सुअच्छा, सहितसुफल, सुमन, सुकाल, सुशील
सम्साथ, पूर्णसम्मान, संगम, संयोग, संहार

2. तद्भव (हिंदी) उपसर्ग

ये उपसर्ग हिंदी की अपनी भाषा से उत्पन्न हुए हैं। इन्हें तद्भव उपसर्ग कहते हैं। ये संस्कृत से बदलकर हिंदी में आए हैं।

तद्भव उपसर्ग के उदाहरण:

उपसर्गउपसर्ग का अर्थउपसर्ग का उदाहरण
अभावउजाड़, उनींद
बुराकपूत
निबिनानिहत्था, निकम्मा, निडर
भरपूराभरमार, भरपेट
अनअभावअनबन, अनपढ़, अनशन
उन्कमउन्नीस, उनतीस
दुदोदुगुना, दुभाषिया
अधआधाअधजला, अधमरा

3. विदेशी/आगत (उर्दू-फारसी-अरबी) उपसर्ग

ये उपसर्ग उर्दू, अरबी और फारसी भाषा से हिंदी में आए हैं। इन्हें विदेशी उपसर्ग या आगत उपसर्ग कहते हैं।

विदेशी/आगत उपसर्ग के उदाहरण:

उपसर्गउपसर्ग का अर्थउपसर्ग का उदाहरण
कमथोड़ाकमजोर, कमबख्त, कमसिन
खुशअच्छाखुशबू, खुशकिस्मत, खुशदिल
बाके साथबाकायदा, बावजूद, बाअदब
दरमेंदरअसल, दरहकीकत
नानिषेधनाराज, नापसंद, नालायक
लारहितलापता, लाचार, लाजवाब
सरमुख्यसरहद, सरताज, सरपंच
हमसाथहमवतन, हमउम्र, हमदर्द
हरप्रतिहर आदमी, हरसाल, हररोज
बदबुराबदनाम, बदकिस्मत, बदमाश
बेबिनाबेकाम, बेशक, बेवफा
गैरअलगगैरहाजिर, गैरकानूनी, गैरजरूरी

उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर

बहुत से विद्यार्थी उपसर्ग और प्रत्यय में भ्रमित हो जाते हैं। नीचे दोनों का सरल अंतर दिया गया है:

बिंदुउपसर्गप्रत्यय
स्थानशब्द के आगे (पहले) लगता हैशब्द के पीछे (अंत में) लगता है
उदाहरण + सत्य = असत्यसुंदर + ता = सुंदरता
उद्देश्यनया या विपरीत अर्थ बनानासंज्ञा, विशेषण आदि बनाना
स्वतंत्र प्रयोगनहीं होतानहीं होता

सरल याद करने का तरीका:

  • उपसर्ग = ऊपर (पहले) लगता है
  • प्रत्यय = पीछे लगता है (प्र + त्यय = बाद में)

उपसर्ग पहचानने के आसान तरीके

परीक्षा में उपसर्ग पहचानना आसान बनाने के लिए ये बातें याद रखें:

  • शब्द को तोड़कर देखें — जो आगे का टुकड़ा अर्थ बदल रहा हो, वह उपसर्ग है।
  • उपसर्ग हटाने पर भी मूल शब्द का अर्थ मिलना चाहिए।
  • उपसर्ग खुद अकेले बोले नहीं जाते।

अभ्यास:

  • प्रति + दिन = प्रतिदिन → “प्रति” उपसर्ग है
  • सम् + मान = सम्मान → “सम्” उपसर्ग है
  • गैर + हाजिर = गैरहाजिर → “गैर” उपसर्ग है

FAQs

प्रश्न 1: उपसर्ग किसे कहते हैं?

उत्तर: जो शब्दांश किसी मूल शब्द के आगे (पहले) जुड़कर उसका अर्थ बदल देता है, उसे उपसर्ग कहते हैं। जैसे — “अ” + “सत्य” = “असत्य”।

प्रश्न 2: हिंदी में उपसर्ग कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: हिंदी में उपसर्ग तीन प्रकार के होते हैं — (1) संस्कृत के उपसर्ग, (2) हिंदी के उपसर्ग, और (3) उर्दू/अरबी-फारसी के उपसर्ग।

प्रश्न 3: उपसर्ग और प्रत्यय में क्या अंतर है?

उत्तर: उपसर्ग शब्द के पहले लगता है जबकि प्रत्यय शब्द के अंत में लगता है। जैसे — “अ+सत्य = असत्य” (उपसर्ग), “सुंदर+ता = सुंदरता” (प्रत्यय)।

प्रश्न 4: “नापसंद” में कौन-सा उपसर्ग है?

उत्तर: “नापसंद” में “ना” उपसर्ग है, जो उर्दू/फारसी भाषा से आया है। यह शब्द के अर्थ को नकारात्मक (विपरीत) बनाता है।

प्रश्न 5: क्या उपसर्ग स्वतंत्र रूप से प्रयोग किए जा सकते हैं?

उत्तर: नहीं। उपसर्ग स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किए जाते। ये केवल किसी मूल शब्द के साथ जुड़कर ही अर्थ देते हैं।


निष्कर्ष

उपसर्ग हिंदी व्याकरण का एक आवश्यक और रोचक हिस्सा है। यह हमारी भाषा को समृद्ध बनाता है और नए शब्द बनाने में मदद करता है। परीक्षा में इससे जुड़े प्रश्न अक्सर आते हैं, इसलिए:

  • उपसर्गों की सूची याद करें।
  • उदाहरणों के माध्यम से अभ्यास करें।
  • उपसर्ग और प्रत्यय का अंतर स्पष्ट रखें।

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