भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु
भारतीय गणराज्य की भौगोलिक सीमाओं का विस्तार उत्तर में हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों से लेकर दक्षिण में हिंद महासागर के विशाल विस्तार तक फैला हुआ है। जब हम भारत के सबसे दक्षिणी बिंदु की चर्चा करते हैं, तो अक्सर सामान्य जनमानस और छात्रों के बीच एक स्वाभाविक संशय उत्पन्न होता है कि क्या वह कन्याकुमारी है या इंदिरा पॉइंट। यह शोध रिपोर्ट इस संशय का वैज्ञानिक और ऐतिहासिक निवारण करती है। भारत के चरम दक्षिणी बिंदुओं का विश्लेषण दो प्रमुख दृष्टिकोणों से किया जाना अनिवार्य है: प्रथम, भारत की मुख्य भूमि (Mainland India) का दक्षिणी छोर, और द्वितीय, भारतीय संघ (Indian Union) का संपूर्ण क्षेत्रीय विस्तार, जिसमें द्वीप समूह भी सम्मिलित हैं । इन दोनों बिंदुओं का अपना विशिष्ट भौगोलिक महत्व, ऐतिहासिक विकासक्रम और सामरिक प्रासंगिकता है, जो भारत की क्षेत्रीय अखंडता और समुद्री शक्ति को परिभाषित करती है।
भारत का दक्षिणतम बिंदु
कन्याकुमारी भारतीय मुख्य भूमि (मेनलैंड) का सबसे दक्षिणी बिंदु है।
इंदिरा पॉइंट संपूर्ण भारतीय क्षेत्र (मुख्य भूमि + द्वीप समूह) का सबसे दक्षिणी बिंदु है।
भारत के संपूर्ण क्षेत्र पर विचार करने पर, सबसे दक्षिणी बिंदु निर्विवाद रूप से ‘इंदिरा पॉइंट’ है । यह बिंदु अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे बड़े और दक्षिणतम द्वीप, ‘ग्रेट निकोबार’ (बड़ा निकोबार) के अंतिम छोर पर स्थित है । यह स्थिति इसे भारत की मुख्य भूमि की तुलना में भूमध्य रेखा के बहुत अधिक निकट लाती है। तुलनात्मक रूप से, मुख्य भूमि का दक्षिणी बिंदु कन्याकुमारी है, जिसका अर्थ है कि इंदिरा पॉइंट मुख्य भूमि से और भी दक्षिण में विस्तृत है ।
प्रशासनिक रूप से, इंदिरा पॉइंट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के निकोबार जिले की ‘ग्रेट निकोबार’ तहसील के अंतर्गत आता है । यह क्षेत्र लक्ष्मीनगर पंचायत के शासन तंत्र द्वारा प्रशासित होता है । यद्यपि यह भारत का अंतिम छोर है, यहाँ की जनसंख्या अत्यंत विरल है। २०११ की जनगणना के अनुसार, यहाँ मात्र ४ परिवार निवास करते थे, जिनकी कुल जनसंख्या २७ थी । इनमें से अधिकांश लोग प्रकाशस्तंभ (Lighthouse) के संचालन और सुरक्षा कार्यों से जुड़े हुए हैं।
भारत के चरम भौगोलिक बिंदुओं का तुलनात्मक विवरण
भारत की क्षेत्रीय व्यापकता को समझने के लिए इसके चारों चरम बिंदुओं के डेटा का विश्लेषण करना आवश्यक है। यह डेटा न केवल देश के विस्तार को दर्शाता है, बल्कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ इसके संबंधों को भी रेखांकित करता है।
| चरम बिंदु की दिशा | स्थान का नाम | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | संबंधित भौगोलिक क्षेत्र |
| उत्तरी छोर | इंदिरा कोल | लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश) | सियाचिन ग्लेशियर, काराकोरम रेंज |
| दक्षिणी छोर (संपूर्ण) | इंदिरा पॉइंट | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | ग्रेट निकोबार द्वीप, हिंद महासागर |
| दक्षिणी छोर (मुख्य भूमि) | कन्याकुमारी | तमिलनाडु | केप कोमोरिन, तीन समुद्रों का संगम |
| पूर्वी छोर | किबिथू | अरुणाचल प्रदेश | अंजाव जिला, भारत-चीन सीमा |
| पश्चिमी छोर | गुहार मोती / सर क्रीक | गुजरात | कच्छ का रण, भारत-पाकिस्तान सीमा |
यह विश्लेषण स्पष्ट करता है कि इंदिरा कोल से कन्याकुमारी तक की उत्तर-दक्षिण दूरी लगभग ३,२१४ किलोमीटर है । हालांकि, यदि हम इंदिरा पॉइंट को आधार मानें, तो यह विस्तार और भी अधिक हो जाता है, जो भारत की हिंद महासागर में गहरी पहुंच का प्रमाण है।
नामकरण का इतिहास: पिग्मेलियन पॉइंट से इंदिरा पॉइंट तक की यात्रा
इंदिरा पॉइंट का इतिहास केवल भौगोलिक नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के राजनीतिक नेतृत्व और द्वीप विकास की प्राथमिकताओं का भी दर्पण है। ऐतिहासिक रूप से, इस स्थल को ‘पिग्मेलियन पॉइंट’ (Pygmalion Point) के नाम से जाना जाता था। ब्रिटिश काल के दौरान और स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशकों में इसी नाम का आधिकारिक मानचित्रों में प्रयोग होता रहा। इसके अतिरिक्त, इसे ‘पारसंस पॉइंट’ (Parsons Point) के नाम से भी संबोधित किया जाता था ।
नाम परिवर्तन की प्रक्रिया १९८४ में आरंभ हुई। भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने १९ फरवरी १९८४ को निकोबार द्वीप समूह की यात्रा की थी । अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने स्थानीय प्रकाशस्तंभ का भी निरीक्षण किया। उस समय स्थानीय संसद सदस्य ने यह प्रस्ताव रखा कि भारत के इस अत्यंत दूरस्थ लेकिन महत्वपूर्ण दक्षिणी बिंदु का नाम उनके नाम पर रखा जाना चाहिए, ताकि देश की मुख्य भूमि के साथ इन द्वीपों का भावनात्मक जुड़ाव मजबूत हो सके । ३१ अक्टूबर १९८४ को उनकी दुःखद हत्या के पश्चात, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस स्थल का नाम बदलने का निर्णय लिया। नामकरण का आधिकारिक समारोह १० अक्टूबर १९८५ को आयोजित किया गया, जिसके बाद से इसे ‘इंदिरा पॉइंट’ के रूप में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई ।
रोचक तथ्य यह भी है कि उत्तर में स्थित ‘इंदिरा कोल’ का नामकरण श्रीमती इंदिरा गांधी के नाम पर नहीं हुआ था। १९१२ में बुलॉक वर्कमैन द्वारा इसका नाम देवी लक्ष्मी के नामों में से एक ‘इंदिरा’ के आधार पर रखा गया था । इस प्रकार, भारत के उत्तर और दक्षिण के दोनों चरम बिंदु ‘इंदिरा’ नाम साझा करते हैं, यद्यपि उनके नामकरण के स्रोत भिन्न हैं।
इंदिरा पॉइंट का रणनीतिक एवं सामरिक महत्व
समुद्री सुरक्षा में भूमिका
इंदिरा पॉइंट भारत की समुद्री सीमा की निगरानी और सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह स्थान भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में गतिविधियों को निगरानी करने हेतु एक महत्वपूर्ण चौकी के रूप में कार्य करता है।
व्यापार मार्गों का संरक्षक
इस क्षेत्र से मलक्का जलडमरूमध्य होकर गुजरने वाले समुद्री व्यापार मार्गों की निगरानी की जा सकती है। इंदिरा पॉइंट पर स्थित प्रकाशस्तंभ भारत से मलेशिया या मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले जहाजों को मार्गदर्शन प्रदान करता है।
निकटवर्ती स्थल
ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिजर्व
ग्रेट निकोबार द्वीप अपने समृद्ध जैव विविधता वाले ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिजर्व के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र विविध प्रकार के दुर्लभ वनस्पतियों और जीवों का आवास है।
कैंपबेल खाड़ी
इंदिरा पॉइंट के निकट स्थित कैंपबेल खाड़ी को भारत के सबसे रहस्यमय स्थानों में से एक माना जाता है।
निष्कर्ष
भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट न केवल एक भौगोलिक स्थलचिह्न है, बल्कि देश की समुद्री सीमाओं का एक महत्वपूर्ण रक्षक भी है। यह स्थान भारत की संप्रभुता का प्रतीक है और रणनीतिक, सुरक्षा एवं पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2004 की सुनामी ने इस क्षेत्र के भूगोल को स्थायी रूप से परिवर्तित कर दिया, लेकिन इसके बावजूद इंदिरा पॉइंट भारत के दक्षिणतम छोर के रूप में अपना महत्व बनाए हुए है। जबकि कन्याकुमारी भारतीय मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिंदु है और एक लोकप्रिय तीर्थ व पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, वहीं इंदिरा पॉइंट संपूर्ण भारतीय क्षेत्र का वास्तविक दक्षिणतम बिंदु है जिसका राष्ट्रीय सुरक्षा एवं भूगोल में विशिष्ट स्थान है।
अगली बार जब कोई आपसे पूछे कि “भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु कौन सा है?”, तो आप आत्मविश्वास से बता सकते हैं – “भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट है जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर 6°45′ उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।”