प्रत्यय – परिभाषा, भेद और उदाहरण
हिंदी व्याकरण में प्रत्यय एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यह न केवल हमारी भाषा को समृद्ध बनाता है, बल्कि शब्द-निर्माण की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करता है। स्कूल से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक — प्रत्यय का ज्ञान अनिवार्य है।
इस लेख में हम प्रत्यय की परिभाषा, उसके मुख्य भेद — कृत् प्रत्यय (विकारी और अविकारी) और तद्धित प्रत्यय (कर्तृवाचक, भाववाचक, ऊनवाचक, संबंधवाचक आदि) — को विस्तार से उदाहरण सहित समझेंगे।
प्रत्यय किसे कहते हैं? (परिभाषा)
वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द या धातु के अंत में जोड़े जाते हैं और उनसे नए शब्द बनते हैं, प्रत्यय कहलाते हैं।
उदाहरण: सुंदर + ता = सुंदरता | लेख + अक = लेखक | भारत + ईय = भारतीय
प्रत्यय स्वतंत्र रूप से अर्थ नहीं रखते, लेकिन मूल शब्द के साथ जुड़ने पर नए अर्थ को जन्म देते हैं।
प्रत्यय के मुख्य भेद (Pratyay ke Bhed)
हिंदी व्याकरण में प्रत्यय को मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया जाता है:
- कृत् प्रत्यय (Krit Pratyay) — क्रिया धातु के अंत में लगने वाले प्रत्यय
- तद्धित प्रत्यय (Taddhit Pratyay) — संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के अंत में लगने वाले प्रत्यय
प्रत्यय का वर्ग | लगता है | उदाहरण |
कृत् प्रत्यय | क्रिया धातु के अंत में | लेख् + अक = लेखक |
तद्धित प्रत्यय | संज्ञा/विशेषण के अंत में | सुंदर + ता = सुंदरता |
A. कृत् प्रत्यय (Krit Pratyay)
जो प्रत्यय क्रिया की धातु (Root Verb) के अंत में लगकर नए शब्द बनाते हैं, उन्हें कृत् प्रत्यय कहते हैं। इनसे बने शब्दों को कृदंत कहते हैं।
उदाहरण: पढ् + आई = पढ़ाई | लिख् + अना = लिखना | चल् + अन = चलन
कृत् प्रत्यय के दो उपभेद होते हैं — विकारी और अविकारी।
A.1 विकारी कृत् प्रत्यय
वे कृत् प्रत्यय जिनसे बने शब्दों के रूप लिंग, वचन, कारक के अनुसार बदलते हैं, विकारी कृत् प्रत्यय कहलाते हैं। इनके चार उपभेद होते हैं:
- क्रियार्थक संज्ञा
जब किसी क्रिया धातु में प्रत्यय लगाकर संज्ञा बनाई जाती है जो क्रिया का भाव व्यक्त करे, तो उसे क्रियार्थक संज्ञा कहते हैं। ये शब्द किसी कार्य, क्रिया या घटना का बोध कराते हैं।
उदाहरण: लड़् + आई = लड़ाई | पढ़् + आई = पढ़ाई | सिल् + आई = सिलाई | कढ़् + आई = कढ़ाई | रो् + आई = रोनाई
धातु (मूल क्रिया) | प्रत्यय | क्रियार्थक संज्ञा |
लड़् | आई | लड़ाई |
पढ़् | आई | पढ़ाई |
सिल् | आई | सिलाई |
बो् | आई | बुआई |
धो् | आई | धुलाई |
लिख् | आवट | लिखावट |
सज् | आवट | सजावट |
मिल् | आवट | मिलावट |
- कतृवाचक संज्ञा
जिन कृत् प्रत्ययों से बने शब्द कार्य करने वाले व्यक्ति (कर्ता) का बोध कराते हैं, उन्हें कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय कहते हैं। ये शब्द बताते हैं कि काम कौन करता है।
उदाहरण: लेख् + अक = लेखक | गा् + अक = गायक | पाठ् + अक = पाठक | खेल् + अड़ी = खिलाड़ी
धातु (मूल क्रिया) | प्रत्यय | कर्तृवाचक संज्ञा | अर्थ |
लेख् | अक | लेखक | लिखने वाला |
गा् (गान) | अक | गायक | गाने वाला |
पाठ् | अक | पाठक | पढ़ने वाला |
खेल् | अड़ी | खिलाड़ी | खेलने वाला |
काट् | ने वाला | काटने वाला | काटने वाला व्यक्ति |
बोल् | ने वाला | बोलने वाला | बोलने वाला व्यक्ति |
नाच् | ने वाला | नाचने वाला | नाचने वाला व्यक्ति |
- वर्तमानकालिक कृदंत
जो कृत् प्रत्यय क्रिया में लगकर वर्तमान काल में हो रही क्रिया का बोध कराते हैं, उन्हें वर्तमानकालिक कृदंत कहते हैं। इनसे ऐसे विशेषण या संज्ञा बनते हैं जो अभी चल रही क्रिया को दर्शाते हैं।
इनमें मुख्यतः ‘ता/ती/ते’ और ‘ता हुआ / ती हुई’ प्रत्ययों का प्रयोग होता है।
उदाहरण: चल् + ता = चलता | हँस् + ती = हँसती | दौड़् + ते = दौड़ते | पढ़् + ता हुआ = पढ़ता हुआ
धातु | प्रत्यय | वर्तमानकालिक कृदंत | वाक्य प्रयोग |
चल् | ता | चलता | राम चलता है। |
हँस् | ती | हँसती | सीता हँसती है। |
दौड़् | ते | दौड़ते | बच्चे दौड़ते हैं। |
पढ़् | ता हुआ | पढ़ता हुआ | पढ़ता हुआ लड़का। |
गा् | ती हुई | गाती हुई | गाती हुई लड़की। |
- भूतकालिक कृदंत
जो कृत् प्रत्यय क्रिया में लगकर बीती हुई क्रिया का बोध कराते हैं, उन्हें भूतकालिक कृदंत कहते हैं। इनसे ऐसे शब्द बनते हैं जो किसी पूर्ण हो चुके कार्य को दर्शाते हैं।
इनमें मुख्यतः ‘या/ई/ए’, ‘आ/ई/ए’ तथा ‘कर/के’ प्रत्ययों का प्रयोग होता है।
उदाहरण: लिख् + आ = लिखा | खा् + ई = खाई | गा् + ए = गाए | देख् + कर = देखकर | पढ़् + के = पढ़के
धातु | प्रत्यय | भूतकालिक कृदंत | वाक्य प्रयोग |
लिख् | आ | लिखा | उसने पत्र लिखा। |
खा् | ई | खाई | उसने खाई खिचड़ी। |
गा् | ए | गाए | उन्होंने गाने गाए। |
देख् | कर | देखकर | देखकर वह चला गया। |
पढ़् | के | पढ़के | पढ़के वह सो गया। |
सो् | या | सोया | बच्चा सोया हुआ है। |
A.2 अविकारी कृत् प्रत्यय
वे कृत् प्रत्यय जिनसे बने शब्दों के रूप लिंग, वचन, कारक के अनुसार नहीं बदलते, अविकारी कृत् प्रत्यय कहलाते हैं। ये क्रियाविशेषण या अव्यय के रूप में काम आते हैं।
उदाहरण: देख् + कर = देखकर | खा् + कर = खाकर | हँस् + ते हुए = हँसते हुए | जा् + ते = जाते
धातु | प्रत्यय | अविकारी कृदंत | भेद |
देख् | कर | देखकर | पूर्वकालिक क्रियाविशेषण |
खा् | कर | खाकर | पूर्वकालिक क्रियाविशेषण |
हँस् | ते हुए | हँसते हुए | वर्तमानकालिक क्रियाविशेषण |
जा् | ते | जाते | अविकारी भाव |
रो् | ते हुए | रोते हुए | वर्तमानकालिक क्रियाविशेषण |
B. तद्धित प्रत्यय (Taddhit Pratyay) और उनके भेद
जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण या अव्यय के अंत में लगकर नए शब्द बनाते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं। हिंदी व्याकरण में तद्धित प्रत्यय के आठ प्रमुख भेद होते हैं।
उदाहरण: भारत + ईय = भारतीय | सुंदर + ता = सुंदरता | कुम्हार + इन = कुम्हारिन | छोट + ड़ा = छोटड़ा
1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय
जो तद्धित प्रत्यय संज्ञा या विशेषण में लगकर ऐसे शब्द बनाते हैं जो किसी कार्य को करने वाले व्यक्ति का बोध कराते हैं, उन्हें कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
पहचान: ये शब्द बताते हैं — ‘कौन काम करता है’ या ‘किसका काम करना व्यवसाय है’।
उदाहरण: नाटक + कार = नाटककार | चित्र + कार = चित्रकार | दूध + वाला = दूधवाला | सोना + आर = सुनार
मूल शब्द | प्रत्यय | नया शब्द | अर्थ |
नाटक | कार | नाटककार | नाटक लिखने वाला |
चित्र | कार | चित्रकार | चित्र बनाने वाला |
साहित्य | कार | साहित्यकार | साहित्य रचने वाला |
दूध | वाला | दूधवाला | दूध बेचने वाला |
फल | वाला | फलवाला | फल बेचने वाला |
सोना | आर | सुनार | सोने का काम करने वाला |
लोहा | आर | लोहार | लोहे का काम करने वाला |
2. भाववाचक तद्धित प्रत्यय
जो तद्धित प्रत्यय संज्ञा, विशेषण या क्रिया में लगकर भाव (Abstract Noun) का बोध कराते हैं, उन्हें भाववाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
पहचान: ये शब्द किसी गुण, दोष, अवस्था या भाव को व्यक्त करते हैं। जैसे — सुंदरता (सुंदर होने का भाव), बचपन (बच्चे होने की अवस्था)।
उदाहरण: सुंदर + ता = सुंदरता | बच्चा + पन = बचपन | मीठा + स = मिठास | बड़ा + ई = बड़ाई
मूल शब्द | प्रत्यय | भाववाचक शब्द | भाव |
सुंदर | ता | सुंदरता | सुंदर होने का भाव |
महान | ता | महानता | महान होने का भाव |
बच्चा | पन | बचपन | बच्चे होने की अवस्था |
लड़का | पन | लड़कपन | लड़के जैसा व्यवहार |
अपना | पन | अपनापन | अपनेपन का भाव |
मीठा | स | मिठास | मीठेपन का गुण |
बड़ा | ई | बड़ाई | बड़े होने का गुण/प्रशंसा |
चतुर | आई | चतुराई | चतुर होने का गुण |
3. ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय
जो तद्धित प्रत्यय किसी शब्द में लगकर उसके लघु (छोटे) रूप या तुच्छता का बोध कराते हैं, उन्हें ऊनवाचक (लघुता वाचक) तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
पहचान: ये शब्द मूल शब्द का छोटा, प्यारा या तुच्छ रूप दर्शाते हैं। इनका प्रयोग प्राय: लाड़ प्यार में भी होता है।
उदाहरण: घर + ड़ा = घरड़ा | नदी + या = नदिया | छोट + ड़ा = छोटड़ा | पहाड़ + ी = पहाड़ी
मूल शब्द | प्रत्यय | ऊनवाचक शब्द | अर्थ |
घर | ड़ा | घरड़ा | छोटा घर |
नदी | या | नदिया | छोटी नदी |
पहाड़ | ी | पहाड़ी | छोटा पहाड़ / पहाड़ी क्षेत्र |
डिब्बा | ई | डिब्बी | छोटा डिब्बा |
छाता | री | छतरी | छोटा छाता |
कटोरा | ी | कटोरी | छोटा कटोरा |
लोटा | ई | लुटिया | छोटा लोटा |
4. संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय
जो तद्धित प्रत्यय किसी शब्द में लगकर संबंध (Relation) का बोध कराते हैं, उन्हें संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
पहचान: ये शब्द बताते हैं कि कोई चीज़ किससे संबंधित है — किसी स्थान से, किसी जाति से, किसी परिवार से आदि।
उदाहरण: भारत + ईय = भारतीय | राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय | मामा + एरा = ममेरा | चाचा + एरा = चचेरा
मूल शब्द | प्रत्यय | संबंधवाचक शब्द | संबंध |
भारत | ईय | भारतीय | भारत से संबंधित |
राष्ट्र | ईय | राष्ट्रीय | राष्ट्र से संबंधित |
मामा | एरा | ममेरा | मामा का पुत्र |
चाचा | एरा | चचेरा | चाचा का पुत्र |
फूफा | एरा | फुफेरा | फूफा का पुत्र |
नाना | हाल | ननिहाल | नाना का घर |
दादा | हाल | ददिहाल | दादा का घर |
5. अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय
जो तद्धित प्रत्यय किसी शब्द में लगकर उसकी संतान (अपत्य = पुत्र/पुत्री) का बोध कराते हैं, उन्हें अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
पहचान: ये शब्द बताते हैं कि कोई व्यक्ति किसका पुत्र या वंशज है। ये प्रत्यय संस्कृत से हिंदी में आए हैं।
उदाहरण: मनु + अ = मानव | रघु + अ = राघव | पाण्डु + अव = पाण्डव | कुरु + अव = कौरव
मूल शब्द | प्रत्यय | अपत्यवाचक शब्द | अर्थ |
मनु | अ | मानव | मनु की संतान |
रघु | अ | राघव | रघु का वंशज (राम) |
पाण्डु | अव | पाण्डव | पाण्डु के पुत्र |
कुरु | अव | कौरव | कुरु के वंशज |
वसु | अ | वासव | वसु का पुत्र |
दशरथ | इ | दाशरथि | दशरथ के पुत्र (राम) |
6. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय
जो तद्धित प्रत्यय संज्ञा में लगकर गुण (Quality) का बोध कराने वाले विशेषण बनाते हैं, उन्हें गुणवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
पहचान: ये शब्द किसी वस्तु या व्यक्ति का गुण, स्वभाव या विशेषता बताते हैं।
उदाहरण: रंग + ीला = रंगीला | शर्म + ीला = शर्मीला | भाव + ुक = भावुक | दया + लु = दयालु
मूल शब्द | प्रत्यय | गुणवाचक शब्द | गुण |
रंग | ीला | रंगीला | रंगों से भरा |
शर्म | ीला | शर्मीला | शर्म करने वाला |
नशा | ीला | नशीला | नशा करने वाला |
भाव | उक | भावुक | भावनाशील |
दया | लु | दयालु | दया करने वाला |
कृपा | लु | कृपालु | कृपा करने वाला |
झगड़ | आलू | झगड़ालू | झगड़ा करने वाला |
7. स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय
जो तद्धित प्रत्यय किसी स्थान, प्रदेश या देश के नाम में लगकर वहाँ के निवासियों या उससे संबंधित चीज़ों का बोध कराते हैं, उन्हें स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
पहचान: ये बताते हैं कि कोई व्यक्ति, वस्तु या भाषा किस स्थान की है।
उदाहरण: पंजाब + ई = पंजाबी | बंगाल + ई = बंगाली | लखनऊ + इया = लखनविया | जयपुर + ी = जयपुरी
मूल शब्द (स्थान) | प्रत्यय | स्थानवाचक शब्द | अर्थ |
पंजाब | ई | पंजाबी | पंजाब का निवासी / भाषा |
बंगाल | ई | बंगाली | बंगाल का निवासी / भाषा |
गुजरात | ई | गुजराती | गुजरात का निवासी / भाषा |
लखनऊ | इया | लखनविया | लखनऊ का निवासी |
जयपुर | ी | जयपुरी | जयपुर से संबंधित |
मुंबई | इया | मुंबइया | मुंबई का रहने वाला |
देहली | ई | दिल्ली | दिल्ली से संबंधित |
8. अव्ययवाचक तद्धित प्रत्यय
जो तद्धित प्रत्यय किसी शब्द में लगकर अव्यय (Indeclinable) बनाते हैं — अर्थात् ऐसे शब्द जो लिंग, वचन, काल से प्रभावित नहीं होते — उन्हें अव्ययवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
पहचान: इनसे बने शब्द कभी नहीं बदलते — न लिंग बदलता है, न वचन। ये रीतिवाचक, कालवाचक या स्थानवाचक क्रियाविशेषण बनाते हैं।
उदाहरण: धीरे + से = धीरे से | एक + ता = एकता | सुबह + ए = सुबहे | यहाँ + तक = यहाँतक
मूल शब्द | प्रत्यय | अव्ययवाचक शब्द | प्रकार |
धीर | े | धीरे | रीतिवाचक क्रियाविशेषण |
एक | ता | एकता | भाववाचक अव्यय |
यहाँ | तक | यहाँतक | स्थानवाचक अव्यय |
अब | तक | अबतक | कालवाचक अव्यय |
सच | मुच | सचमुच | रीतिवाचक अव्यय |
फिर | भी | फिरभी | समुच्चयबोधक अव्यय |
C. स्त्रीवाचक प्रत्यय (Stri Vachak Pratyay)
जो प्रत्यय पुल्लिंग शब्दों में लगकर उन्हें स्त्रीलिंग में बदलते हैं, उन्हें स्त्रीवाचक प्रत्यय कहते हैं। ये तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत ही आते हैं।
उदाहरण: कुम्हार + इन = कुम्हारिन | नाई + इन = नाइन | लड़का + ई = लड़की | शेर + नी = शेरनी
पुल्लिंग शब्द | प्रत्यय | स्त्रीलिंग शब्द |
कुम्हार | इन | कुम्हारिन |
नाई | इन | नाइन |
धोबी | इन | धोबिन |
शेर | नी | शेरनी |
मोर | नी | मोरनी |
सिंह | नी | सिंहनी |
लड़का | ई | लड़की |
बेटा | ई | बेटी |
नाना | ई | नानी |
दादा | ई | दादी |
सभी तद्धित प्रत्यय भेद — एक नज़र में
क्र. | भेद | पहचान | उदाहरण |
1 | कर्तृवाचक | कार्य करने वाला व्यक्ति | नाटककार, दूधवाला |
2 | भाववाचक | गुण/भाव/अवस्था का बोध | सुंदरता, बचपन |
3 | ऊनवाचक | लघुता या प्यार का भाव | कटोरी, डिब्बी |
4 | संबंधवाचक | किससे संबंधित है | भारतीय, ममेरा |
5 | अपत्यवाचक | किसकी संतान है | मानव, पाण्डव |
6 | गुणवाचक | गुण/स्वभाव बताना | रंगीला, दयालु |
7 | स्थानवाचक | किस स्थान से है | पंजाबी, जयपुरी |
8 | अव्ययवाचक | अव्यय बनाना (अपरिवर्तनीय) | धीरे, सचमुच |
FAQs
प्रश्न 1: कृत् प्रत्यय और तद्धित प्रत्यय में क्या अंतर है?
उत्तर: कृत् प्रत्यय क्रिया धातु के अंत में लगते हैं (जैसे — लेख् + अक = लेखक), जबकि तद्धित प्रत्यय संज्ञा/विशेषण/सर्वनाम के अंत में लगते हैं (जैसे — सुंदर + ता = सुंदरता)।
प्रश्न 2: विकारी और अविकारी कृत् प्रत्यय में क्या भेद है?
उत्तर: विकारी कृत् से बने शब्दों के रूप लिंग-वचन से बदलते हैं (जैसे — लड़ाई / लड़ाइयाँ), जबकि अविकारी कृत् से बने शब्द नहीं बदलते (जैसे — देखकर — यह सदा एक जैसा रहता है)।
प्रश्न 3: वर्तमानकालिक और भूतकालिक कृदंत में क्या अंतर है?
उत्तर: वर्तमानकालिक कृदंत अभी चल रही क्रिया का बोध कराते हैं (चलता, हँसती), जबकि भूतकालिक कृदंत पूर्ण हो चुकी क्रिया का बोध कराते हैं (लिखा, देखकर, गाए)।
प्रश्न 4: भाववाचक और कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय की पहचान कैसे करें?
उत्तर: भाववाचक शब्द किसी गुण या अवस्था को बताते हैं (सुंदरता = सुंदर होने का भाव), जबकि कर्तृवाचक शब्द किसी कार्य को करने वाले व्यक्ति को बताते हैं (चित्रकार = चित्र बनाने वाला)।
प्रश्न 5: ऊनवाचक प्रत्यय किसे कहते हैं?
उत्तर: जो प्रत्यय मूल शब्द का छोटा या प्यारा रूप बनाते हैं, जैसे — कटोरा + ी = कटोरी, डिब्बा + ई = डिब्बी।
प्रश्न 6: अपत्यवाचक प्रत्यय के उदाहरण क्या हैं?
उत्तर: मनु + अ = मानव, पाण्डु + अव = पाण्डव, रघु + अ = राघव — ये सभी अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण हैं।
प्रश्न 7: स्थानवाचक और संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय में क्या फर्क है?
उत्तर: स्थानवाचक में किसी भौगोलिक स्थान का संदर्भ होता है (पंजाब + ई = पंजाबी), जबकि संबंधवाचक में पारिवारिक या अन्य संबंध होते हैं (मामा + एरा = ममेरा)।
निष्कर्ष (Conclusion)
इस लेख में हमने प्रत्यय के संपूर्ण वर्गीकरण को विस्तार से समझा:
- कृत् प्रत्यय — विकारी (क्रियार्थक संज्ञा, कर्तृवाचक संज्ञा, वर्तमानकालिक कृदंत, भूतकालिक कृदंत) और अविकारी
- तद्धित प्रत्यय — कर्तृवाचक, भाववाचक, ऊनवाचक, संबंधवाचक, अपत्यवाचक, गुणवाचक, स्थानवाचक, अव्ययवाचक
- स्त्रीवाचक प्रत्यय — पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने वाले
प्रत्यय का सही ज्ञान आपकी हिंदी भाषा को न केवल समृद्ध बनाता है, बल्कि परीक्षाओं में शब्द-निर्माण, संधि और समास जैसे विषयों को भी समझने में बहुत सहायता करता है।
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